पूर्वांचल में सपा-बसपा की सियासी सामाजिकता और भाजपा के मोदिज्म का इम्तिहान

वाराणसी। पांचवें चरण का मतदान खत्म होने के साथ ही यूपी में लोकसभा का चुनावी रथ पूर्वांचल पहुंच चुका है। माना जा रहा है कि अंतिम दो चरणों की लड़ाई ही केंद्र में अगली सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका तय करेगी। भाजपा, कांग्रेस और गठबंधन ने इस क्षेत्र में पूरा जोर भी लगा दिया है।
छठें और सातवें चरण में 27 सीटों पर वोटिंग होगी। हम बात करेंगे पूर्वांचल के तीन मंडलों में स्थित दस जिलों वाराणसी, सोनभद्र, बलिया, गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, मिर्जापुर, जौनपुर, भदोही और चंदौली के 13 लोकसभा सीटों की। इन 13 में 12 सीटों पर भाजपा और उसके सहयोगी अपना दल (एस) का कब्जा है। एक सीट सपा के पास है। यानी सपा-बसपा या कांग्रेस के पास खोने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। कांग्रेस वाराणसी और मिर्जापुर में ही तीसरे स्थान तक आ सकी। अन्य सीटों पर चौथे या उससे भी नीचे चली गई।
इस बार के चुनाव में स्थिति थोड़ी अलग है। सपा-बसपा एकजुट हैं लेकिन गठबंधन के सामने अपने कैडर वोटरों को एकजुट रखना बड़ी चुनौती होगी। वहीं सीटों को बरकरार रखने में भाजपा की अंकगणित और सपा-बसपा की केमेस्ट्री कितना सफल होती है यह चुनाव के बाद ही पता चलेगा।
वाराणसी समेत चार सीटों पर भाजपा सहज
पूर्वांचल की 13 में से चार सीटों वाराणसी, सलेमपुर, मिर्जापुर और राबर्ट्सगंज की अंक गणित भाजपा के लिए सुखद है। सपा-बसपा को मिले वोटों का जुड़ाव भाजपा के वोटों के आसपास भी नहीं ठहरता है। 2014 में वाराणसी में भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र मोदी को 5 लाख 81 हजार और आप के अरविंद केजरीवाल को 2 लाख 9 हजार वोट मिले थे। कांग्रेस के अजय राय को 75 हजार, बसपा के विजय प्रकाश जायसवाल को 60 हजार और सपा के कैलाश चैरसिया 45 हजार वोट हासिल हुए थे।
कांग्रेस को केवल मिर्जापुर में एक लाख से ज्यादा वोट मिले
पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हालत पूर्वांचल में ठीक नहीं रही थी। किसी सीट पर चुनौती बनना तो दूर केवल वाराणसी और मिर्जापुर में ही कांग्रेस के प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे। अन्य सीटों पर उसके प्रत्याशी चौथे या पांचवें स्थान पर फिसल गए। मिर्जापुर से ललितेश पति त्रिपाठी इकलौते ऐसे प्रत्याशी रहे जिन्हें एक लाख से ज्यादा वोट हासिल हुए।
तीन सीटों पर कौमी एकता दल ने दिखाई थी ताकत
पिछले लोकसभा चुनाव में कौमी एकता दल ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ मिलकर पूर्वांचल की कई सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इनमें चार सीटों पर कांग्रेस से भी ज्यादा वोट झटके थे। इस बार कौमी एकता दल का बसपा में विलय हो चुका है और सुभासपा अकेले लड़ रही है। बलिया में कौमी एकता दल के अफजाल अंसारी को 16343, घोसी में मुख्तार अंसारी को 166443 और गाजीपुर में डीपी यादव को 69510 मत मिले थे। सलेमपुर में सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश खुद मैदान में थे। उन्हें 66084 वोट मिले थे।
2014 में 13 सीटों पर भाजपा, सपा-बसपा की स्थिति…
वाराणसीः भाजपा के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी को 5 लाख 81 हजार और आप के अरविंद केजरीवाल को 2 लाख 9 हजार वोट मिले थे। कांग्रेस के अजय राय को 75 हजार, बसपा के विजय प्रकाश जायसवाल को 60 हजार और सपा के कैलाश चौरसिया 45 हजार वोट हासिल हुए। सभी वोट मिलाने पर भी भाजपा के वोटों से काफी कम रह जाते हैं।
बलियाः भाजपा प्रत्याशी भरत सिंह को 3 लाख 59 हजार के करीब मत मिले। सपा के नीरज शेखर को 2 लाख 20 हजार और बसपा के वीरेंद्र पाठक को 1 लाख 41 हजार वोट हासिल हुए थे। सपा-बसपा के वोट मिलने के बाद भाजपा से ज्यादा हो रहे हैं। यह स्थिति तब थी जब कौमी एकता दल भी मैदान में था। इसके प्रत्याशी अफजाल अंसारी को 1 लाख 63 हजार से ज्यादा मत मिले थे। इस बार कौमी एकता दल बसपा में अपना विलय कर चुका है।
गाजीपुरः भाजपा के मनोज सिन्हा को 3 लाख 7 हजार के करीब मत मिले। सपा की शिवकन्या कुशवाहा को 2 लाख 74 हजार और बसपा के कैलाश यादव को 2 लाख 41 हजार वोट मिले थे। कौमी एकता दल के डीपी यादव भी मैदान में थे। उन्हें 69 हजार 5 सौ मत मिले। यहां भाजपा के बागी माने जा रहे अरुण कुमार ने निर्दल प्रत्याशी के रूप में ताल ठोंकी और 34 हजार वोट हासिल किये। यह वोट भाजपा में ट्रांसफर हुए तब भी गठबंधन के आसपास नहीं ठहरते।
घोसीः भाजपा के हरिनारायन राजभर को 3 लाख 79 हजार वोट मिले। बसपा के दारा सिंह चौहान को 2 लाख 33 हजार और सपा के राजीव राय को 1 लाख 65 हजार वोट हासिल हुए थे। कौमी एकता दल से खुद मुख्तार अंसारी मैदान में थे। उन्हें 1 लाख 66 हजार से ज्यादा मत मिले।
आजमगढः सपा के मुलायम सिंह यादव ने 3 लाख 40 हजार वोट हासिल करते हुए भाजपा के रमाकांत यादव को 60 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। बसपा के शाह आलम ने भी 2 लाख 66 हजार से ज्यादा वोट हासिल किये थे। इस बार आजमगढ़ जिले की दूसरी सीट लालगंज में भी सपा-बसपा के वोट भाजाप के लिए चुनौती हैं। यहां भाजपा की नीलम सोनकर को 3 लाख 24 हजार वोट मिले थे। जबकि सपा के बेचई सरोज को 2 लाख 60 हजार और बसपा के बलिराम को 2 लाख 33 हजार मत मिले।
जौनपुरः जौनपुर सदर में भाजपा के केपी सिंह को 3 लाख 67 हजार मत मिले थे। बसपा के सुभाष पांडेय को 2 लाख 20 हजार और सपा के पारसनाथ यादव को 1 लाख 80 हजार वोट मिले। यहां भी गठबंधन के वोट भाजपा से कुछ ज्यादा है। हालांकि निर्दल मैदान में उतरे धनंजय सिंह और आम आदमी पार्टी से मैदान में आए केपी सिंह को भी एक लाख से ज्यादा वोट मिले थे। यह वोट इस बार निर्णायक हो सकते हैं।
मछलीशहर जौनपुर की ही दूसरी सीट है। यहां भाजपा के रामचरित्र निषाद को 4 लाख 38 हजार से ज्यादा मत मिले। बसपा के बीपी सरोज को 2 लाख 66 हजार और सपा के तूफानी सरोज को 1 लाख 91 हजार वोट हासिल हुए। बसपा-सपा के वोट देखने से तो भाजपा के वोटों से ज्यादा दिखाई देते हैं लेकिन प्रत्याशियों के पाला बदल के कारण मामला यहां थोड़ा जटिल भी है। भाजपा के सांसद रामचरित्र निषाद अब सपा की ओर से मिर्जापुर से प्रत्याशी हैं और बसपा के बीपी सरोज भाजपा की ओर से मैदान में हैं। यह दोनों अपने वोटों पर क्या प्रभाव छोड़ते हैं, यह 23 मई को पता चलेगा।
भदोहीः भाजपा के वीरेंद्र सिंह मस्त को 4 लाख 3 हजार वोट मिले थे। बसपा के राकेशधर दुबे को 2 लाख 45 हजार और सपा की सीमा मिश्रा को 2 लाख 38 हजार वोट हासिल हुए। सीमा मिश्रा भदोही से विधायक विजय मिश्रा की बेटी हैं। विजय मिश्रा एक बार निषाद पार्टी से अलग होने के बाद फिर से जुड़ गए हैं। निषाद पार्टी का भाजपा को समर्थन भी है। ऐसे में सपा को मिले वोटों में निषाद पार्टी की सेंध ही बीजेपी के लिए स्थितियां सुखद कर सकती है।
चंदौलीः भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय एक बार फिर मैदान में हैं। उन्हें पिछली बार 4 लाख 14 हजार वोट मिले थे। बसपा के अनिल मौर्य को 2 लाख 57 हजार और सपा के रामकिशुन को 2 लाख 4 हजार वोट मिले थे।
राबर्ट्सगंजः भाजपा के छोटेलाल खरवार को 3 लाख 78 वोट मिले थे। बसपा के शारदा प्रसाद को 1 लाख 87 हजार और सपा के पकौड़ी लाल कोल को 1 लाख 36 हजार वोट मिले। भाजपा ने इस बार यह सीट सहयोगी अपना दल (एस) को दी है। अपना दल ने पिछली बार सपा प्रत्याशी रहे पकौड़ी लाल कोल को उतारा है। यहां का अंकगणित भी फिलहाल भाजपा के वोटों से काफी दूर दिखता है।
सलेमपुरः भाजपा के रवींदर कुशवाहा को 3 लाख 92 हजार वोट मिले थे। बसपा के रविशंकर सिंह पप्पू को 1 लाख 59 हजार और सपा के हरिवंश कुशवाहा को भी करीब उतने ही 1 लाख 59 हजार वोट हासिल हुए। यहां से सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर भी मैदान में उतरे थे। उन्हें 66 हजार वोट मिले थे।
मिर्जापुरः भाजपा के सहयोगी अपना दल-एस की अनुप्रिया पटेल 4 लाख 36 हजार वोट मिले। बसपा की समुद्रा बिन्द को 2 लाख 17 हजार और सपा के सुरेंद्र पति त्रिपाठी को 1 लाख 8 हजार ही वोट मिले थे।