आखिर राजीव और उनके ससुराल वालों की किस छुट्टी का जिक्र कर रहे हैं मोदी

छुट्टियों के दौरान समंदर से निकलते राजीव गांधी (31 जनवरी, 1988 को इंडिया टुडे में छपी तस्वीर)।

नई दिल्ली । पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को ‘मिस्टर क्लीन’ से ‘भ्रष्टाचारी नंबर वन’ में तब्दील होने संबंधी अपने बयान पर कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रियाओं के बाद भी पीएम नरेंद्र मोदी का उन पर हमला कर रहे हैं। मोदी ने कहा, यह बात तब की है, जब राजीव गांधी भारत के पीएम थे और 10 दिन की छुट्टियां मनाने निकले थे। उनके पूरे कुनबे को लेकर आईएनएस विराट खास द्वीप पर 10 दिन तक रुका रहा। राजीव गांधी के साथ छुट्टी मनाने वालों में उनके ससुराल वाले भी थे। क्या विदेशी लोगों को वॉरशिप पर ले जाकर देश की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं किया था? पीएम ने कहा कि नेवी के जवानों और हेलिकॉप्टर को भी गांधी परिवार और राजीव गांधी के ससुराल वालों की सेवा में लगाया गया था। हालांकि प्रधानमंत्री ने उस द्वीप का नाम नहीं लिया था जहां राजीव गांधी अपने परिवार, ससुराल वालों और पारिवारिक मित्रों के साथ छुट्टी मनाने गए थे, लेकिन बाद में उन्होंने इंडिया टुडे पत्रिका की छह साल पुरानी एक रिपोर्ट को ट्वीट किया जिसमें इस पूरे मामले का विस्तार से जिक्र है।
1987 में गांधी परिवार ने मनाई थी छुट्टी
तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी अपने परिवार, रिश्तेदारों और पारिवारिक मित्रों के साथ 1987 के अंत में नए साल का स्वागत करने लक्षद्वीप के नजदीक एक बेहद खूबसूरत द्वीप पर छुट्टियां मनाने गए थे। इसे मीडिया से छिपाने की हर मुमकिन कोशिश की गई थी लेकिन इसकी भनक मीडिया को लग गई थी। ‘इंडिया टुडे’ ने 31 जनवरी 1988 को गांधी परिवार की उस छुट्टी का पूरा विवरण भी छापा था। बाद में नवंबर 2013 में भी इंडिया टुडे ने तस्वीरों के साथ सिलसिलेवार ढंग से गांधी परिवार के उस ‘पिकनिक’ के बारे में बताया था।
लक्षद्वीप के पास बंगाराम द्वीप पर मनाई थी छुट्टियां
इस रिपोर्ट के मुताबिक तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी 1987 में अपने पूरे परिवार, ससुराल पक्ष के कुछ लोगों और खास दोस्तों के साथ लक्षद्वीप के पास बंगाराम नाम के एक खूबसूरत द्वीप पर नए साल का जश्न मनाने के लिए पहुंचे थे। वे वहां 10 दिनों तक रहे थे।
गांधी परिवार के साथ और कौन-कौन गया था?
इस दौरान राजीव गांधी, सोनिया गांधी, दोनों के बच्चे- राहुल और प्रियंका व उनके 4 दोस्त, राजीव गांधी की साली और उनके साढ़ू, राजीव की सास आर माइनो के अलावा सोनिया के भाई और मामा साथ में थे। इसके अलावा, राजीव गांधी के खास दोस्त अमिताभ बच्चन, उनकी पत्नी जया बच्चन और बच्चन परिवार के 3 बच्चे शामिल थे। तीनों बच्चों में अमिताभ के दोनों बच्चों के अलावा उनके भाई अजिताभ की बेटी भी शामिल थीं। उस वक्त अजिताभ थ्म्त्। के उल्लंघन के मामले में फंसे थे। गांधी और बच्चन फैमिली के अलावा राजीव गांधी के मित्र अरुण सिंह के भाई बिजेंद्र सिंह और 2 विदेशी मेहमान भी उस आलीशान पार्टी में शामिल हुए थे। गांधी परिवार का ख्याल रखने के लिए दिल्ली से उनका पर्सनल कुक भी बंगाराम द्वीप गया था।
10 दिन अरब सागर में खड़ा रहा INS विराट
गांधी परिवार की छुट्टियों के दौरान उस वक्त का भारत का प्रमुख युद्धपोत प्छै विराट 10 दिनों के लिए अरब सागर में खड़ा रहा। उस वक्त खबरों में यह भी कहा गया कि गांधी परिवार को ले जाने के लिए प्छै विराट का इस्तेमाल हुआ था। इस पर रक्षा विशेषज्ञों ने सवाल भी उठाया था कि छुट्टियों के लिए नेवी का इस्तेमाल क्यों हो रहा है। 6 जनवरी को गांधी परिवार की यह आलीशान छुट्टी खत्म हुई थी।
राजीव और सोनिया गांधी 30 दिसंबर 1987 को दोपहर में ही इस खूबसूरत द्वीप पर पहुँच गए थे, जबकि अमिताभ बच्चन एक दिन बाद कोचीन-कावारत्ती हेलीकॉप्टर उड़ान से वहाँ पहुँचे थे। बंगाराम द्वीप पर अमिताभ बच्चन की यात्रा की खबर को दबाने की कोशिश की गई थी, लेकिन कावारत्ती के छोटे से द्वीप में अमिताभ की मौजूदगी उस वक्त जाहिर हो गई जब अमिताभ के हेलीकॉप्टर को बंगाराम से कुछ दूर कारावत्ती में ईंधन भरवाने के लिए उतरना पड़ा। बाद में अमिताभ जब छुट्टियां मनाकर वापस लौट रहे थे तो कोचीन एयरपोर्ट पर इंडियन एक्सप्रेस के एक फोटोग्राफर ने उनकी तस्वीर ले ली। अमिताभ इसे लेकर नाराज भी हुए और फोटोग्राफर को चेतावनी भी दी थी।

अमिताभ बच्चन की ये तस्वीर इंडियन एक्सप्रेस के फोटोग्राफर जीवन जोश ने खींची थी, जो इंडिया टुडे में छपी थी।
अमिताभ बच्चन की ये तस्वीर इंडियन एक्सप्रेस के फोटोग्राफर जीवन जोश ने खींची थी, जो इंडिया टुडे में छपी थी।

क्यों चुना बंगाराम
बंगाराम द्वीप पूरी तरह निर्जन है और तकरीबन आधा वर्गकिलोमीटर इलाके में फैला है। इस द्वीप का चुनाव भी काफी सोच-समझकर किया गया था, यहाँ विदेशी नागरिकों के आने पर किसी तरह की पाबंदी नहीं थी। लक्षद्वीप के तत्कालीन पुलिस प्रमुख पीएन अग्रवाल ने कहा कि बंगाराम द्वीप बेहद सुरक्षित और दुनिया से कटा हुआ इलाका है। यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से सुरक्षित है।
रखा गया था पूरा खयाल
छुट्टी मना रहे सभी लोग इसे पूरी तरह एंजॉय कर रहे थे। स्वीमिंग, सनबाथ से लेकर फिशिंग तक, सभी इस शानदार द्वीप पर अपना पूरा समय बेहद इत्मिनान के साथ और लुत्फ उठाते हुए बिता रहे थे। पिकनिक मनाने के लिए पास ही मौजूद दो और द्वीप थिन्नकारा और पारिल में भी ये लोग गए थे। राजीव, राहुल और प्रियंका जहां बेहद साफ नीले पानी का आनंद उठा रहे थे, वहीं सोनिया गांधी अस्थमा के डर से अपनी मां और जया बच्चन के साथ नारियल के पेड़ की छांव में बातें करती थीं।
लक्षद्वीप प्रशासन की ओर से सभी के लिए खाने का इंतजाम किया गया था। बंगाराम द्वीप पर दो रसोइयों समेत पांच लोग रुके थे। गांधी परिवार के खाने की पसंद का ख्याल रखने के लिए दिल्ली से उनका पर्सनल कुक भी गया था, जो दिशा-निर्देश दे रहा था। इतना ही नहीं, नई दिल्ली से शराब भी ले जाई गई थी। पास में मौजूद एक अन्य द्वीप में 100 चिकन की भी व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा लक्षद्वीप से ताजे फल जिनमें पपीता, सपोता, केले और अमरूद भेजे गए थे। कावारत्ती से 100 ब्रेड और बटर मंगाए गए थे। इसके अलावा कोचीन से चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक्स की 40 क्रेट, मिनरल वाटर की 300 बोतल, अमूल चीज, काजू, 20 किलो आटा, 105 किलो चावल और कुछ ताजी सब्जियां मंगाई गई थीं। इन सामानों की पहली खेप 23 दिसंबर को, दूसरी खेप तीन दिन के बाद और फिर 1 जनवरी को कुछ सामान भेजा गया।
नेहरू भी कर चुके हैं ऐसा!

पंडित जवाहरलाल नेहरू, बेटी इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और संजय गांधी।
पंडित जवाहरलाल नेहरू, बेटी इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और संजय गांधी।

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू भी सपरिवार युद्धपोत में आराम करते नजर आए थे। ये बात जून, 1950 की है। इसी साल देश का संविधान लागू किया गया था। एक जानकारी के मुताबिक तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान उनके पोते राजीव गांधी और संजय गांधी ने आईएनएस दिल्ली में नौसेना अभ्यास में भाग लिया था। इस तस्वीर में पंडित जवाहरलाल नेहरू, प्रधानमंत्री, अपनी बेटी इंदिरा के साथ युद्धपोत में आराम करते हुए नजर आते हैं।
एक और तस्वीर में पीएम नेहरू के साथ उनके दो पोते संजय गांधी और राजीव गांधी दिखते हैं। ये जून 1950 की तस्वीर है। पीएम नेहरू के इंडोनेशिया यात्रा के दौरान आईएनएस दिल्ली के डेक पर राजीव और संजय गांधी दिख रहे हैं। नेवी के अधिकारी उनके आस-पास मौजूद हैं।