#MenToo: पुरुषों के लिए समानता की लड़ाई

मुंबई । एक योगा ग्रुप के सदस्य ऋषि (बदला नाम) को रविवार सुबह एक स्टूडियो में मैट और अन्य चीजें लगाने के लिए जल्दी आना था। ऋषि को अपने चेंबूर स्थित घर से मलाड स्थित स्टूडियो पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करके आना होता। हालांकि लिव-इन में रहने वाले योग के पेशे से जुड़े एक जोड़े लीना और करन ने ऋषि को शनिवार रात अपने घर ठहरने को कहा ताकि रविवार सुबह वह अपना काम आसानी से कर सके।
शनिवार को करन घर पर नहीं था और लीना ऋषि की तरफ आकर्षित हो गई। ऋषि और लीना आपसी सहमति से संबंध बनाने को सहमत हो गए जो महीनों तक चला। ऋषि को लगा यह रिश्ता किसी सही मोड़ पर नहीं जा रहा तो उसने किसी दूसरी लड़की से शादी करने की सोची। वह इस लड़की से पहले मिल चुका था। तभी लीना ने ऋषि पर रेप के आरोप लगा दिए।
ऋषि (30) को गिरफ्तार कर लिया गया और उसे एक सप्ताह जेल में बिताने पड़े। कोर्ट में यह मामला करीब तीन साल चला और फरवरी 2018 में उसे इस मामले में बरी कर दिया गया। लेकिन ऋषि की जिंदगी बिखर गई। उसने अपनी नौकरी, दोस्त और दुनिया का सामना करने का हौसला सब गंवा दिया।
पुरुषों के अधिकार की रक्षा के लिए बनाए गए वास्तव फाउंडेशन के अमित देशपांडे ने बताया, वह करीब एक साल पहले मेरे पास आया था। तब हमने काउंसलिंग के जरिए उसे भावनात्मक मजबूती दी। देशपांडे ने 2014 में इस फाउंडेशन की स्थापना तब की थी जब वह घेरलू हिंसा के झूठे आरोप के खिलाफ लड़कर जीते थे।
इस तरह के अधिकार झूठे केस दहेज प्रताड़ना और घेरलू हिंसा के होते हैं। लेकिन अब सहमति से संबंध बनाने के मामले में भी रेप के आरोप लगाए जाने लगे हैं। देशपांडे ने कहा, अधिकतर मामले में ये केस उगाही का जरिया बन गए हैं। रेप केस के मामलों में 74% लोग बरी हो जाते हैं। लेकिन रेप के आरोप के कारण एक पुरुष की प्रतिष्ठा तार-तार हो जाती है।
एक बार जब इस तरह के मामले दर्ज हो जाते हैं तो एक पुरुष को हर स्तर पर चाहे पुलिस, न्यायपालिका, मीडिया, दोस्त, परिवार संदेह की नजर से देखा जाता है। यह केवल मिथक है कि महिलाएं पुरुषों को प्रताड़ित नहीं करती हैं। अगर हमें समान अधिकार के लिए काम करना है तो हमें पुरुषों के लीगल रिकोर्स के लिए भी काम करना होगा। जबतक ऐसे मामलों में अपराध साबित न हो जाए शिकायतकर्ता और सिस्टम द्वारा आरोपी की पहचान गुप्त रखी जाए। ऐसा नहीं करने पर जुर्माने का प्रावधान होना चाहिए।