जुकाम, खांसी और गले में दर्द है सीजनल एलर्जी के लक्षण

नई दिल्ली। मौसम बदलने के कारण जो एलर्जी होती है उसे सीजनल एलर्जी कहते है, जिसमें जुकाम, खांसी, गला खराब होना और बुखार आदि शामिल है। बच्चा अगर बहुत ज्यादा थकान का शिकार होता हो, उसे सर्दी-जुकाम बना रहता हो, नाक में खुजली हो तो इसे एलर्जी हो सकती है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक कमजोर बड़ो की तुलना में कमजोर होने के कारण बच्चे जल्दी एलर्जी का शिकार हो जाते है। गुरुग्राम स्थित नारायणा सुपर स्पेशेलिटी अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन के एचओडी एंड डारेक्टर डॉ सतीश कौल ने बच्चों को सीजनल एलर्जी से बचाने और इसके लक्षणों के बारे में कुछ सुझाव दिए हैं, जिनका सहारे आप अपने बच्चों को इस सीजनल एलर्जी से बचा सकते हैं।
मौसम में बदलाव से बच्चों में दूषित पानी और खान-पान के कारण एलर्जी से दस्त, पीलिया और डायरिया जैसी बीमारियां हो सकती है।
सीजनल एलर्जी के लक्षण
सीजनल एलर्जी के लक्षणों में आंखों में जलन होना, जुकाम, गला खराब होना, बहती नाक या बंद नाक, उल्टी, दस्त, कमजोरी और बुखार मुख्य रूप से शामिल है।
सीजनल एलर्जी से उपचार के तरीके
बदलते मौसम में होने वाली एलर्जी से उपचार के लिए हमें एलर्जी से बचाव करना चाहिए। बाहर निकलते समय मुंह ढ़क कर निकलना, बाहर का भोजन न करना, मार्केट में मिलने वाले पेय पदार्थ जैसे कोल्ड ड्रीक, गन्ने का जूस, गोलगप्पे के सेवन से बचें। इन उपायों से आप बदलते मौसम में होने वाली एलर्जी से बच सकते है।
माता-पिता बच्चों को इस बीमारी से कैसे बचाएं और उन्हें कैसे इससे दूर रखें?
बच्चों को बदलते मौसम में होने वाली एलर्जी से बचाने के लिए माता-पिता को अपने बच्चे पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि बच्चे को धुल-मिट्टी से एलर्जी है तो बाहर खेलने के दौरान नाक पर कपड़ा बांधकर रखना चाहिए। इसके लिए बच्चों को बाहर का खाना, गोलगप्पे, गन्ने का जूस नहीं देना चाहिए। जितना हो सके बच्चों को घर का बना हुआ फ्रेश खाना की खिलाएं, बासी खाना ना दें। उल्टी और दस्त की शिकायत होने पर ओआरएस का घोल पिलाएं।