चीन से बराबरी के लिए 996 फार्मूले पर मेहनत करे भारत

नई दिल्ली। भारत में चीनी सामानों के बहिष्कार की बार-बार उठते मांग चीनी मीडिया संस्थानों को अक्सर चुभती है। इसलिए, वे हमेशा चीन की मैन्युफैक्चरिंग पावर के सामने भारत को बौना साबित करने की कोशिश में जुटे रहते हैं। चीनी मीडिया का यही रवैया फिर सामने आया जब सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भारत को चीन की बराबरी करने के लिए कड़ी मेहनत करने की नसीहत दे डाली।
ग्लोबल टाइम्स ने अपने एक लेख में कहा कि चीन के सबसे धनी शख्स और विशालकाय ऑनलाइन शॉपिंग प्लैटफॉर्म अलीबाबा के फाउंडर जैक मा के हालिया सुझाव का हवाला दिया और कहा कि भारत को सप्ताह के 6 दिन 9 बजे सुबह से 9 बजे रात तक काम करने की संस्कृति अपनानी चाहिए। जैक मा ने इसे 996 का फॉर्म्युला बताया था जिसकी कड़ी आलोचना हुई थी।
चीनी अखबार ने कहा कि भारत का अकुशल विनिर्माण क्षेत्र (इनएफिशंट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर) सुनिश्चित करेगा कि वह चीन से बराबरी नहीं कर पाएगा। इस कारण से चीन सामानों पर पाबंदी लगाने की भारत की कोशिश भी बेकार जाएगी।
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, भारत अगर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में चीन से मुकाबला करना चाहता है तो उसे 996 फॉर्म्युले को गंभीरता से अपनाना चाहिए। इसमें कहा गया है, भारत 996 अपनाकर अपना कारोबारी माहौल सुधार सकता है, विदेशी निवेश आकर्षित कर सकता है और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ा सकता है।
अखबार ने कहा है कि चीनी सामानों पर भारतीय प्रतिबंध से चिंता की कोई वजह नहीं है। लेख कहता है, भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर चीन से मुकाबले के योग्य बिल्कुल नहीं है। चीन रोजमर्रा के अच्छे सामान, कम कीमत पर उपलब्ध कराने में सक्षम है, लेकिन भारत में यह क्षमता नहीं है।
अखबार ने इस लेख में प्रधानमंत्री के एक बयान पर भी टिप्पणी की है। उसने लिखा, कुछ भारतीयों द्वारा चीनी सामानों के बहिष्कार की वकालत करने के सवाल पर प्रधानमंत्र नरेंद्र मोदी ने कहा कि इसे लोगों को तय करने दीजिए। गौरतलब है कि मोदी ने एक निजी न्यूज चैनल से कहा था, जहां तक चीनी सामानों के प्रति लोगों (भारतीयों) की भावना का सवाल है तो हमें इसे लोगों की सूझबूझ पर छोड़ देना चाहिए।
चीनी अखबार कहता है, कुछ लोगों को लगता है कि मोदी ने चतुराई से भारत में चीनी सामानों के बहिष्कार की मांग पर सहमति जताई, लेकिन हमें ऐसा नहीं लगता है। मोदी आखिर लोगों की सूझबूझ पर भरोसा क्यों करेंगे? चूंकि बहिष्कार का अभियान असफल ही होना है, इसलिए भारतीय दोबारा चीनी सामानों का ही रुख करेंगे।
ग्लोबल टाइम्स का दावा है कि भारतीयों पर राष्ट्रवाद का भूत लंबे समय तक चढ़ा नहीं रह सकता। कुछ लोग, कुछ वक्त तक चीनी सामानों का बहिष्कार कर सकते हैं, लेकिन आखिर में उन्हें कम कीमत पर अच्छे चीनी सामान अपनी तरफ दोबारा खींच लाएंगे।
लेख में कहा गया है कि भारत अगर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दुनिया के अग्रणी देशों की लिस्ट में ऊपर बढ़ना चाहता है तो उसे चीन से सबक लेना होगा। लेख कहता है, इस उपलब्धि का कुछ श्रेय चीनी कर्मचारियों के कठिन परिश्रम और कुछ रिसर्च और डिवेलपमेंट में लगे लोगों तथा आंट्रप्रन्योर्स को जाता है।
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, 996 शेड्यूल चीन में आम बात है। कई चीनी कामगारों ने इसे अपनाया और यहां बहुत से अरबपति ज्यादा-से-ज्यादा घंटे काम करते हैं। आर्टिकल में कहा गया है, लेकिन, भारत में विदेशी निवेशक अक्सर तुलनात्मक तौर पर कम कामकाजी घंटे और स्थानीय कामगारों को बहुत ज्यादा सामाजिक कल्याण का लाभ देने की शिकायत करते हैं।
आर्टिकल आगे कहता है, भारत को इस कार्यसंस्कृति को 996 जैसे फॉर्म्युले से बदलनी होगी ताकि चीनी सामानों को टक्कर देने योग्य उत्पादन की उम्मीद जग सके। ग्लोबल टाइम्स इस लेख के आखिर में कहा गया है, भारत के आगे कठिन चुनौती मुंह बाए खड़ी है। 996 शेड्यूल और कठिन परिश्रम करने के जुनून के बिना भारत चीन से मुकाबला नहीं कर सकता।