लोकसभा चुनावः इस बार बनारसियों के धंधे में नहीं नजर आ रही रौनक

  • मोदी के खिलाफ केजरीवाल जैसा मजबूत उम्मीदवार न होने से नीरस हुआ चुनाव,
  • इसका सबसे ज्यादा नुकसान वाराणसी के छोटे-बड़े व्यापारियों को उठाना पड़ रहा है,
  • ट्रैवल एजेंसियों, होटेलों और ठेले-खुमचे वालों को काम ना मिलने से घोर निराशा है
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वाराणसी । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव लड़ने से पूरे देश की नजर वाराणसी पर है लेकिन यहां के कारोबारी ‘झटका’ लगने से मायूस हैं। कारण साफ है इस बार पीएम मोदी के मुकाबले में अरविंद केजरीवाल जैसा कोई दमदार उम्‍मीदवार चुनाव मैदान में नहीं है। समर्थकों की वह भीड़ भी नहीं है, जो 2014 के चुनाव में वाराणसी शहर के लोगों ने देखी थी। चुनाव प्रचार के लिए बस एक सप्‍ताह का समय बाकी है लेकिन बड़े-छोटे होटलों से लेकर लॉज-गेस्‍ट हाउस खाली हैं तो ट्रैवल एजेसियों में गाड़ियों की बुकिंग का टोटा है। चुनावी सीजन शुरू होने पर टकटकी लगाए ठेले-खुमचे वालों तक को निराशा ने घेर रखा है। ऐसे में जेब भरने की अभिलाषा पर गहरी चोट से कारोबारियों को उबरने में समय लगेगा।
वाराणसी में चुनाव ऐसे समय पर हो रहा है, जब पर्यटन के लिहाज से ऑफ सीजन है। फरवरी से सितंबर महीने तक गर्मी-बरसात के मौसम के चलते विदेशी पर्यटक आते नहीं हैं तो देशी पर्यटकों की संख्‍या भी काफी कम होती है। इन दिनों पर्यटन इंडस्‍ट्री से जुड़े लोगों के हाथ खाली रहते हैं। पिछला आम चुनाव भी इसी समय पर हुआ था लेकिन नरेंद्र मोदी के गुजरात से निकलकर देश की राजनीति में सक्रिय होने और चुनाव लड़ने की घोषणा ने वाराणसी को अलग ही रंग में सराबोर कर दिया था। चुनावी अखाड़े में नरेंद्र मोदी के मुकाबले में अरविंद केजरीवाल के उतरने और लगातार यहीं डटे रहने से देशभर से आने वाले समर्थकों की दो महीने तक ऐसी भीड़ रही कि उसमें वाराणसी ही खो गए थे। देश ही नहीं, विदेशी मीडिया भी लंबे समय तक डटी रही थी।
इस बार प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए नरेंद्र मोदी ने चुनाव लड़ने के लिए वाराणसी सीट को ही चुना तो उनके खिलाफ प्रियंका के मैदान में उतरने की चर्चा से वाराणसी कारोबारी पूरे पांच साल बाद एक बार फिर श्अच्‍छे दिनश् आने के सपने दिन में ही देखने लगे थे। नामांकन के अंतिम समय में स्थिति साफ होने से निराशा ने उन्‍हें घेर लिया। पीएम मोदी के मुकाबले में इस बार भी कांग्रेस प्रत्‍याशी अजय राय और एसपी-बीएसपी गठबंधन से शालिनी यादव के होने से माहौल ‘चुपचाप’ है। न प्रचार की तेजी और न गरमाहट। दिन-रात घाटों से डिबेट दिखाने वाले ख‍बरिया चैनल वाले भी गायब हैं।
2014 में हाउसफुल रहा था वाराणसी
चुनावी रण में नरेंद्र मोदी और केजरीवाल होने से महासंग्राम का गवाह बनने को लोगों के गंगा नहाने, दर्शन-पूजन और बिजनस के बहाने भी आने से करीब दो महीने तक वाराणसी हाउसफुल रहा था। कोई ऐसा शहर नहीं बचा था, जहां के लोग आए न हों। ऐसे में होटल-लॉज फुल हुए तो बाहर से आने वाले तमाम लोग वाराणसी में रह रहे किसी न किसी से परिचय निकाल गेस्‍ट बने थे। होटल महंगे होने से मकानों में किराए पर कमरे लेने के लिए बोली लगी थी। अंतिम दिनों में तो स्थिति यह हो गई थी कि बाग-बगीचे भी आशियाना बन गए थे। घूमने के लिए गाड़ियां तो दूर ऑटो मिलना तक मुश्किल रहा। रेस्‍ट्रॉन्ट मालिकों को तो छोड़िए, सड़क किनारे कचैड़ी-जलेबी, बाटी-चोखा, सत्तू लस्‍सी और इडली-डोसा या लाई-चना बेचने वाले तक मालामाल हो गए थे।
इस बार फुटपाथ से शोरूम तक खाली
महासंग्राम में उतरने वाली सेनाओं के लिए फुटपाथ लेकर शोरूम तक चुनावी प्रचार के हर तरह के सामान से सजे हैं लेकिन खरीदार नहीं है। कारण प्रचार में सबसे आगे बीजेपी ने केसरिया से लेकर ‘नमो अगेन’ वाली नीली टीशर्ट, बिल्‍ला-टोपी, कागज का मोदी मुखौटा, काफी मग, दीवार घड़ी, सदरी समेत चुनाव प्रचार के बाकी सभी सामान की बड़ी खेप बाहर से मंगा घर-घर बंटवा दी है। शहर की सड़कें बीजेपी की होर्डिंग्‍स, पोस्‍टर-बैनर से सजी हैं लेकिन इन्‍हें तैयार करने का जिम्‍मा स्‍थानीय कारोबारियों को नहीं मिला। सबकुछ बाहर से आने से चुनाव प्रचार सामग्री के काम से जुड़े लोग फांका मार रहे हैं।
पर्यटन इंडस्‍ट्री पर एक नजर
वाराणसी शहर में बड़े-छोटे होटल, लॉज-गेस्‍ट और पेइंग गेस्‍ट हाउस की संख्‍या – करीब 800
(इसके अलावा धर्मशालाएं और मठ हैं)
ट्रैवल एजेंसियां- लगभग 200
रेस्‍टोरेंट/भोजनालय- 400
सड़कों पर ठेले-खुमचे- 1000 से ज्‍यादा
पटरी पर खिलौने व अन्‍य सामान बेचने वाले- 1000 से ज्‍यादा
नावें- 3000
वाराणसी साड़ी की फुटकर दुकानें-500
2014 चुनाव में हुए कारोबार पर एक नजर
(ऑफ सीजन के दो महीने में अनुमानित)
होटलों-लॉज,गेस्‍ट हाउस का कारोबार- करीब 15 से 17 करोड़
ट्रैवल एजेंसियों का कारोबार- 5 से 6 करोड़
ऑटो रिक्‍शा व पटरी वालों की कमाई- करीब दो करोड़
नाविकों व फूल-माला बेचने वाले- दो करोड़
रेस्‍ट्रॉन्ट-भोजनालय और ठेले-खुमचे वालों का कारोबार- छह से सात करोड़
सा‍ड़ी की बिक्री – करीब 50 लाख
(इसके अलावा मकानों में किराए पर लिए गए कमरों की आमदनी अलग है।)
इस बारे में वाराणसी होटल असोसिएशन के महामंत्री गोकुल शर्मा ने कहा, पीएम मोदी के नामांकन और प्रचार के अंतिम दौर में ही बाहर से समर्थकों के आने से होटलों की मांग निकली लेकिन 2014 की तरह लगातार हाउसफुल की स्थिति नहीं है। महानगर उद्योग व्यापार समिति के अध्यक्ष प्रेम मिश्र ने कहा, पिछले चुनाव की तुलना में इस बार काफी कम लोगों के कम दिनों के लिए ही वाराणसी आने से पर्यटन इंडस्‍ट्री से जुड़े कारोबारियों के लिए सामान्‍य दिनों जैसी स्थिति है।
टूरिस्‍ट वेलफेयर असोसिएशन के अध्यक्ष राहुल कुमार ने कहा, पिछले चुनाव के समय ऑफ सीजन के बावजूद पर्यटन इंडस्‍ट्री से जुड़े लोगों ने जमकर कमाई थी। उस तुलना में इस बार सन्‍नाटा है। एक्सिलेंस ट्रैवल एजेंसी के शैलेंद्र सिंह ने कहा, इस चुनाव में गाड़ियों की मांग पिछले चुनाव की तुलना में चैथाई भी नहीं है। प्रचार के अंतिम दिन के गाड़ियों की बुकिंग शुरू होने से कुछ उम्‍मीद बंधी है।