52 साल में पहली बार ठाकरे लड़ सकते हैं चुनाव

  • उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे लड़ सकते हैं विधानसभा चुनाव,
  • शिवसेना की तरफ से सीएम फेस हो सकते हैं जूनियर ठाकरे
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मुंबई । शिवसेना के भीतर करीब 52 साल बाद (1966 में पार्टी बनी थी) एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है। अभी तक पार्टी में सिर्फ ‘रिमोट कंट्रोल’ की भूमिका में रहते आए ठाकरे परिवार (बालासाहेब ठाकरे और उद्धव ठाकरे) में अब शायद पहली बार कोई चुनाव लड़कर सामने से राजनीतिक लड़ाई लड़ने को तैयार है। जी हां, उद्धव ठाकरे के बेटे और युवा सेना के प्रमुख आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र में अक्टूबर में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में बतौर शिवसेना प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं।
माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में देशभर में एनडीए की प्रचंड जीत और महाराष्ट्र में शिवसेना-बीजेपी गठबंधन के शानदार प्रदर्शन के बाद 28 साल के आदित्य ने अब चुनाव के जरिए अब सामने से राजनीति में आने का मन बनाया है।
दरअसल, सोमवार को आदित्य के चचेरे भाई और युवा सेना में उनके सहायक वरुण सरदेसाई ने सोशल प्लैटफॉर्म इंस्टाग्राम पर लिखे एक पोस्ट में इस बात के संकेत दिए हैं। वरुण ने लिखा, मिशन 2019 विधानसभा चुनाव के लिए यही सही वक्त है। यही सही मौका है। महाराष्ट्र आपका इंतजार कर रहा है…आदित्य ठाकरे। वरुण के इस पोस्ट को आदित्य के मिशन चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है और माना जा रहा है कि यह संकेत है कि शिवसेना परिवार में पहली बार कोई सीधे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है।
आदित्य ठाकरे शिवसेना के गढ़ वर्ली या फिर सीवरी विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। शिवसेना सचिव मिलिंद नार्वेकर ने भी आदित्य के चुनाव लड़ने के पर्याप्त संकेत दिए हैं। नार्वेकर ने कहा, मेरे सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने आदित्य को यह सलाह दी है कि उन्हें विधानसभा चुनाव जरूर लड़ना चाहिए। इससे पार्टी को फायदा होगा। साथ ही आदित्य के आने से प्रदेश को युवा नेतृत्व भी मिलेगा। हम चाहते हैं कि वह लड़ें, हालांकि इस पर अंतिम निर्णय उन्हें ही करना है। हालांकि आदित्य किस सीट से चुनाव लड़ेंगे इस बारे में नार्वेकर ने स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा।
बड़ी भूमिका की तैयारी में आदित्य
बता दें कि लोकसभा चुनाव में महाजीत के बाद संसद के सेंट्रल हॉल में जब पीएम मोदी एनडीए सहयोगियों को संबोधित कर रहे थे, आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ठीक बगल वाली कुर्सी पर बैठे थे। उधर, उद्धव ठाकरे एनडीए सहयोगी पार्टी शिवसेना की तरफ से मंच पर मौजूद थे। ऐसे में सूबे के सीएम के ठीक बगल वाली कुर्सी पर आदित्य के बैठने से भी यह संकेत गया है कि अब ‘जूनियर’ ठाकरे पार्टी में बड़ी भूमिका के लिए भी तैयार हो रहे हैं।
शिवसेना के एक और पदाधिकारी ने कुछ ऐसे ही संकेत दिए हैं। उन्होंने बताया, इस बार अगर विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां साथ उतरती हैं तो अब सीएम पद के लिए मौका शिवसेना का है। ऐसे में आदित्य ठाकरे अगर चुनाव लड़ते हैं तो इससे ना सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ेगा बल्कि गठबंधन के पक्ष में रिजल्ट आने पर सीएम पद के लिए उद्धव शिवसेना का उम्मीदवार भी हो सकते हैं।
आदित्य देते रहे हैं संकेत, जरूरत पड़ने पर लड़ेंगे चुनाव
पार्टी के एक अन्य पदाधिकारी ने आदित्य के चुनाव लड़ने का संकेत देते हुए कहा, शिवसेना चाहती है कि आदित्य को इस तरह की सीट से लड़ाया जाए, जहां कोई रिस्क ना हो। हालांकि अभी आदित्य ठाकरे की तरफ से इस बारे में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। हालांकि वह कई मौकों से यह संकेत देते रहे हैं कि वह ठाकरे परिवार के पहले ऐसे सदस्य होंगे जो चुनावी मैदान में उतरकर जनादेश प्राप्त करने की कोशिश करेगा।