नहीं चेते तो आपदा में बदल जाएगा जल संकट

  • चन्द्रकान्त त्रिपाठी

पूरे देश में जल संकट गहराता जा रहा हैं । गर्मियों में हालात भीषण हो जाते हैं। अभी भी हम सब बेसब्री से मॉनसून का इंतजार कर रहे हैं। केरल से थोड़ी राहत की खबर आयी है कि देर से ही सही, वहां मॉनसून पहुंच गया है। दूसरी ओर जल संकट को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों से विचलित कर देने वाली खबरें सामने आ रही हैं।
ये खबरें इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में हमें किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। हाल में महाराष्ट्र के औरंगाबाद के फूलंबरी की महिलाओं का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दिखाया गया है कि अपनी बाल्टी को भरने के लिए महिलाएं एक पानी के टैंकर के पीछे कैसे बेतहाशा दौड़ रही हैं। तमिलनाडु के त्रिची से खबर आयी कि पानी को लेकर हुए विवाद में एक युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी गयी। मृतक पानी का टैंकर चलाता था। रांची में भी पानी भरने को लेकर हुए विवाद में चाकूबाजी हो गई। राजस्थान के अलवर जिले में लोगों के बीच पानी को लेकर हुई खूनी संघर्ष हो गया। मप्र के कई इलाकों में भी गंभीर जल संकट है। लोगों को कई-कई किलोमीटर का रास्ता तय करने के बाद ही पानी मिल पा रहा है।
गुजरात भी भारी जल संकट से जूझ रहा है। बताया जाता है कि गुजरात के एक इलाके में तो शादी के मुहूर्त पानी के टैंकर के हिसाब से तय होते हैं। कर्नाटक के कई जिलों ने तो पानी की कमी के कारण स्कूलों को एक सप्ताह के लिए बंद कर देना पड़ा। मप्र के देवास में भीषण गर्मी के दौरान पानी न मिलने की वजह से 15 बंदरों की मौत हो गयी। तमाम इलाकों में नलों से पानी आना बंद हो गया।
ये सारी खबरें विचलित करने वाली हैं और गंभीर जल संकट का प्रमाण हैं। ऐसा नहीं कि ऐसी परिस्थिति का निर्माण अचानक हुआ या ऐसी चेतावनी पहली बार सामने आ रही हो। पिछले साल नीति आयोग ने कहा था कि देश अब तक के सबसे बड़े जल संकट से गुजर रहा है और अगर तुरंत कदम नहीं उठाये गये, तो 2030 तक देश में सबको पीने का पानी देना संभव नहीं होगा। केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट में भी चेताया गया है कि अगर अच्छी बारिश नहीं हुई, तो पानी की भारी किल्लत के लिए तैयार रहें।
पानी की कमी का बड़ा कारण जल का अत्यधिक दोहन और जल संचयन न करना है। जनसंख्या का पर्यावरण पर दबाव बढ़ता जा रहा है। लिहाजा, इस पर भी हमें सोचना होगा। हम सभी को जल संचय का संकल्प लेना होगा, अन्यथा यह बड़ी आपदा का रूप ले लेगा।