राहुल गांधी के ‘राइट हैंड’ की रेस में …

  • चन्द्रकान्त त्रिपाठी

2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को मिली करारी हार के बाद राहुल गांधी इस्तीफे की जिद पर अड़े हुए हैं और सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। खबर ये भी है कि राहुल गांधी के कार्यभार को साझा करने के लिए एक कार्यकारी अध्यक्ष का चुनाव कर सकती है। माना जा रहा है कि पार्टी का नया कार्यकारी अध्यक्ष राहुल गांधी की जिम्मेदारियों का कुछ भार अपने कंधे पर लेगा। जिससे राहुल उन मुद्दों पर सोच पाएंगे जिन पर यदि उन्होंने काम कर लिया तो आने वाले वक्त में पार्टी की स्थिति अच्छी हो जाएगी।
इस समय कई ऐसे नाम चर्चा में तैर रहे हैं जो न सिर्फ राहुल गांधी के लिए मददगार साबित होंगे बल्कि आने वाले समय में पार्टी तक को एक नई दिशा देकर उसे भविष्य में होने वाले चुनावों के लिए तैयार करेंगे। इन्हीं में सचिन पायलट का भी नाम है। सचिन पायलट और राहुल गांधी का रिश्ता किसी से छुपा नहीं है। सचिन का शुमार राहुल गांधी के विश्वासपात्रों में है। साथ ही वो पार्टी के अधिकांश वरिष्ठ नेताओं को पसंद हैं। सचिन पायलट हमेशा आगे आकर खेलने वाले नेता है साथ ही वो जनता में भी खासे लोकप्रिय हैं। 2013 में जब सचिन को कांग्रेस के पुनर्निर्माण के लिए राजस्थान भेजा गया था उन्होंने अपना काम बखूबी अंजाम दिया। 2018 में हुए विधानसभा चुनाव कांग्रेस की जीत में सचिन का बड़ा हाथ रहा है। सचिन जी हुजूरी करने वाले नेता नहीं है और उन्हें फैसले लेना आता है।
दूसरा नाम अशोक गहलोत का भी चर्चा में है। हालांकि अपने बेटे वैभव के कारण अशोक गहलोत खासी किरकिरी का सामना कर चुके हैं मगर पार्टी में जो उनका कद है उस कद के कारण राहुल गांधी का सहयोगी बनने की इस रेस में उनका भी नाम आगे आ रहा है। कांग्रेसी नेता अहमद पटेल के खास गहलोत, इसलिए भी चर्चा में हैं क्योंकि अहमद खुद सोनिया के विश्वासपात्र हैं और कहा यही जाता है कि सोनिया खुद उनकी बातें नहीं टालती हैं। गहलोत में लोगों को एकजुट रखने की क्षमता है। गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं। राजस्थान में कांग्रेस की सरकार में उनका भी अहम रोल रहा है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम भी रेस में है। बहरहाल लोकसभा चुनाव में हार और पश्चिमी यूपी के असफल प्रभारी होने के बाद भी सिंधिया सिर्फ इसलिए इस रेस में हैं क्योंकि वो राहुल ब्रिगेड के अहम सदस्य हैं। कहने को सिंधिया मध्य प्रदेश का एक बड़ा चेहरा हैं मगर वहां पार्टी बुरी तरह से गुटबाजी का शिकार है। ज्योतिरादित्य सिंधिया हों या फिर कमलनाथ और दिग्विजय सिंह हर कोई यही चाहता है कि सत्ता उसके पास रहे।
इस रेस में सबसे बड़ा नाम प्रियंका गांधी वाड्रा का है। बात कांग्रेस के एक ऐसे अध्यक्ष की चल रही है जो न सिर्फ पार्टी को मजबूती दे. बल्कि राहुल गांधी के कन्धों का भार अपने कंधे पर ले। प्रियंका गांधी सबसे उपयुक्त नाम कहा जा सकता है। कांग्रेस के नेता दूसरे गांधी का स्वागत भी करेंगे। कहा जा सकता है कि पार्टी में प्रियंका के लिए अपार संभावनाएं हैं और यहां रहकर वो राहुल गांधी के अलावा पार्टी के लिए बहुत कुछ कर सकती हैं।
भले ही लोकसभा चुनाव में अपेक्षित परिणाम न आये हों लेकिन प्रियंका का लोगों में चार्म है। कांग्रेस में राहुल के बाद सिर्फ सिर्फ प्रियंका में भीड़ को खीचने का माद्दा है। अहम बात है कि यदि प्रियंका अध्यक्ष बनती हैं और राहुल की मदद के लिए आगे आती हैं तो भाई और बहन के बीच फैसलों को लेकर गतिरोध और अन्तर्विरोध कम होगा और सबसे अच्छी बात ये भी होगी सत्ता भी उसी परिवार में रहेगी जहां वो वर्तमान में है।
बहरहाल, एक ऐसे वक्त में, जब पार्टी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है बेहतर यही होगा कि जल्द से जल्द स्थिति साफ हो जाए और उस नाम की घोषणा हो जाए जो राहुल गांधी के साथ मिलकर कांग्रेस की डूबती नैया का खेवैया बनेगा। बाकी बात नामों की चल रही है तो जैराम रमेश, अहमद पटेल, गुलाम नबी आजाद और दिग्विजय सिंह वो नाम है जिनको लेकर पार्टी के अन्दर सुगबुगाहट मची हुई है और कहा जा रहा है कि यदि इनमें से कोई अध्यक्ष बनता है तो इनका अनुभव पार्टी के लिए मददगार साबित हो सकता है।

1 Comment

  1. कांग्रेस इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। अब इससे बुरा दौर शायद तब ही होगा जबकि पार्टी को भंग करने की घोषणा कर दी जाये। फिलहाल तो मोदी के 56 इंची के आगे कांग्रेस के 52 पत्तों की गड्डी क्या कमाल दिखाएगी… यह आने वाले समय में देखने लायक बात होगी। पार्टी में राहुल के इस्तीफे का मसला तो सुलझ ही जाएगा। ज्यादातर संभावना प्रियंका के ही ‘राइट हैण्ड’ बनने की लगती हैं!

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