56 साल बाद बदला ट्रेनों का रंग, अब लाल-सुनहरे होंगे कोच

गोरखपुर। 1963 के बाद पहली बार ट्रेनों के बोगियों का रंग बदलने जा रहा है। कन्वेशनल बोगियां अब नीली की बजाए सुनहरी और लाल दिखेंगी। बोगियों को नए कलेवर में करने का काम वर्कशॉप ने शुरू कर दिया है। जल्द ही नए कलेवर की बोगियां पटरियों पर फर्राटा भरेंगी। वर्कशॉप ने पेंटिंग का काम शुरू कर दिया है। एक सप्ताह में 10 बोगियों को सुनहरा और लाल कर दिया गया। वर्कशॉप प्रबंधन का कहना है कि नीली रंग वाली जो भी बोगियां वर्कशॉप में आती जाएंगी उनका रंग बदल कर ही ट्रैक पर भेजा जाएगा। 1963 के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है जब नीली रंग की कन्वेशनल बोगियों का रंग बदल रहा है। 1963 उन्हीं ट्रेनों की बोगियों का रंग बदला गया जो सामान्य ट्रेनों से हटकर थीं। मसलन राजधानी, शताब्दी, दूरंतो, हमसफर, अंत्योदय और तेजस एक्सप्रेस की बोगियों का रंग सामान्य नीली बोगियों से भिन्न है। लेकिन अब नीले रंग का भी अस्तित्व खत्म होने जा रहा है।
नीली रंग की बोगियों पर जो पेंट चढ़ाए जा रहे हैं वह पीयू यानी कि पॉली यूरेथिन पेंट है। यह पेंज सामान्य पेंट की तुलना में काफी चमकदार और लम्बे समय तक चलने वाला है।इसकी खूबी यह है कि दूर से ही आकर्षक दिखेगा।
नई दिख रही हैं बोगियां
गोल्डेन और रेड कलर की पेंटिंग हो जाने के बाद बोगियां चमकदार तो दिख ही रही हैं साथ ही पुरानी बोगियां भी पूरी तरह से नई दिख रही हैं।
चार दिन में एक बोगी की पेंटिंग
पेंटिंग में कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए वर्कशॉप के पेंट शॉप में पहले नीली रंग की बोगियों का नीला उतारा जा रहा है। उतर जाने के बाद उस पर पेंट को चढ़ाया जा रहा है। इस प्रक्रिया में चार दिन वक्त लग रहा है।
महत्वपूर्ण ट्रेनों की बोगियों का रंग
रजधानी एक्सप्रेस – लाल
शताब्दी एक्सप्रेस – गहरा नीला
दूरंतो एक्सप्रेस – हरा
गरीब रथ – गहरा हरा
तेजस – भूरा और पीला