जायरा ही नहीं धार्मिक वजह से मोहम्मद रफी ने भी छोड़ दिया था गाना

मुम्बई। एक बार हरदिल अजीज और महान गायक मोहम्मद रफी ने भी मौलवियों के कहने पर तब फिल्मों में गाना बंद कर दिया था, जब वह अपने करियर के शिखर पर थे। लेकिन यह तो अच्छा हुआ कि जल्द ही रफी साहब को यह एहसास हो गया कि फिल्मों में गाना कहीं से भी गलत नहीं है। वरना दुनिया ऐसे सैकड़ों नगमों से महरूम रह जाती जो उन्होने एक ब्रेक के बाद फिर से गाए। यह बात तब की है जब मोहम्मद रफी साहब हज पर गए तो उन्हें कहा गया कि अब आप हाजी हो गए हैं। इसलिए अब आपको गाना-बजाना सब बंद कर देना चाहिए।
रफी साहब एक सीधे-सच्चे और बेहद शरीफ इंसान थे। वह लोगों की बातों में आ गए और उन्होंने गाना छोड़ दिया। जिससे फिल्मी दुनिया में हड़कंप मच गया। जिस गायक की दीवानगी लोगों के सिर चढ़ कर बोल रही थी, वह अचानक गाना बंद कर दे, तो उनके प्रशंसकों के दिल पर क्या बीतेगी, यह कल्पना की जा सकती है। हालांकि आज भारतीय फिल्म संगीत की इस बड़ी घटना के बारे में ज्यादातर लोगों को कुछ पता नहीं है। कुछ लोग इस घटना को अफवाह बताते हैं और कुछ कहते हैं ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था। यहां तक रफी जिन मशहूर संगीतकार जोड़ी कल्याणजी आनंदजी के साथ बरसों गाते रहे। जिनके साथ रफी ने श्सारे शहर में आपसा कोई नहींश् और श्वादा करले साजनाश् जैसे कितने ही सुपर हिट गीत दिए, उन्हें भी ऐसी कोई घटना याद नहीं कि रफी साहब ने कभी इस्लाम के आधार पर गाना छोड़ दिया था।
इस जोड़ी में अब मौजूद आनंद जी से जब मैंने इस संबंध में बात की तो वह बोले, ष्मुझे तो ऐसी घटना याद नहीं आ रही कि उन्होंने किसी मौलवी के कहने पर गाना छोड़ दिया हो। हमारे साथ तो वह अंत तक गाते रहे।ष् लेकिन जब इस घटना का सच जानने के लिए मैंने रफी साहब के बेटे शाहिद रफी से बात की तो उन्होंने इस घटना को सच बताते हुए बाकयदा पुष्टि की। शाहिद रफी साहब मेरे पूछने पर बताते हैं, ष्जी यह सच है, रफी साहब ने इस्लाम की बात पर एक बार फिल्मों में गाना बंद कर दिया था।
लेकिन अल्लाह का शुक्र है कि उन्होंने कुछ समय बाद अपने फैसले को बदल दिया और सभी ने राहत की सांस ली।ष् क्या यह तभी की बात है जब वह हज से लौटे थे और उनको मौलवियों ने अब फिल्मों के गीत संगीत से दूर रहने की सलाह दी?
यह पूछने पर शाहिद रफी बताते हैं, जी बिल्कुल, उन्होंने ऐसा फैसला किया था। मसले कुछ ऐसे बन गए थे। यह सन 1971 की बात है, रफी साहब और हमारी अम्मा दोनों हज पर गए थे। जब वह वहाँ से लौटने लगे तो वहाँ के मौलवियों ने ही उन्हें कहा कि अब आप हाजी हो गए हैं। इसलिए अब आपको फिल्मों में नहीं गाना चाहिए। इसके बाद उन्होंने देश लौटकर गाने गाना बंद कर दिया।
तब कितने समय तक रफी साहब ने गाने नहीं गाए और क्या नौशाद साहब के समझाने पर ही उन्होंने फिर से गाना शुरू किया? इस पर शाहिद रफी बताते हैं, ष्कितने समय तक गाना नहीं गाया यह तो पूरा याद नहीं। लेकिन यह पता है कि उनको नौशाद साहब ने भी समझाया, कुछ और लोगों ने भी और मेरे बड़े भाइयों ने भी समझाया।
उनके गाना बंद करने से घर परिवार का खर्च चलना बंद हो जाना था। तब भाइयों ने कहा कि आपका गला ही परिवार के रोजगार का जरिया है। अब आप न कोई नौकरी कर सकते हैं और न कोई बिजनेस और न कुछ और। बस अल्लाह ने जो गला दिया है, जो इतनी खूबसूरत आवाज बख्शी है, वही सब कुछ है। इसलिए आप फिल्मों में फिर से गाइए। तब रफी साहब ने एक ब्रेक के बाद फिर से फिल्मों में गाना शुरू किया।