‘मोडी’ लहर! वॉट्सऐप के जरिए फिर से जिंदा हो रही 700 साल पुरानी मराठी लिपि

  • ‘मराठी की कजिन’ कही जाने वाली प्राचीन और लुप्तप्राय लिपि को सीखने को लेकर लोगों में उत्साह,
  • लिपि के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से वॉट्सऐप पर एक ग्रुप है, जिसका नाम ‘मोडी 11’ है
    ———————————————————————————————————–

मुंबई । लोकसभा चुनाव में दूसरी बार प्रचंड जनादेश हासिल कर केंद्र की सत्ता पर काबिज होने वाले नरेंद्र मोदी की लहर के अलावा महाराष्ट्र में एक और ‘मोदी’ लहर की चर्चा है। ‘मराठी की कजिन’ कही जाने वाली राज्य की एक प्राचीन और लुप्तप्राय लिपि को सीखने को लेकर लोगों में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है। इस लिपि को सिखाने और इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से वॉट्सऐप पर एक ग्रुप संचालित किया जाता है, जिसका नाम ‘मोडी 11’ है।
पेशवा करते थे इस्तेमाल
मोडी लिपि 700 साल पहले पेशवाओं द्वारा लिखने के लिए इस्तेमाल की जाती थी। मुंबई के डोम्बिवली के रहने वाले अक्षय प्रमभुदेसाई मोडी लिपि सिखाने वाले वॉट्सऐप ग्रुप ‘मोडी 11’ का हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि मोडी स्क्रिप्ट सीखना उनकी हॉबी है और इसके लिए उन्होंने बड़ी मुश्किल से सोशल मीडिया पर यह ट्यूटोरियल ढूंढा था। प्रभुदेसाई इसके लिए 799 रुपये फीस भी देते हैं। उन्होंने बताया कि वॉट्सऐप पर उनके टीचर उन्हें मोडी स्क्रिप्ट के अक्षर भेजते हैं जिसे वह ब्लैक पेन की मदद से कागज पर कॉपी करते हैं और फिर उसकी तस्वीर अपने शिक्षक के पास वॉट्सऐप के ही जरिए भेज देते हैं।

‘मोडी 11’ पर दो हजार लोगों ने ली क्लास
प्रभुदेसाई बताते हैं कि वह अब मोडी स्क्रिप्ट में अपना हस्ताक्षर कर लेते हैं। मोडी स्क्रिप्ट के प्रचार-प्रसार के लिए चलाए जाने वाले इस वॉट्सऐप ग्रुप को नासिक के रहने वाले सोजवाल साली चलाते हैं। साली से अब तक 2000 लोगों ने मोडी स्क्रिप्ट की क्लासेज ली हैं। उन्होंने अपने विजिटिंग कार्ड पर अपने आपको ‘मोडी लिपि एक्सपर्ट’ बताया है। साली ने बताया कि साल 2016 में एक बार जब उन्होंने किसी अधिकारी को अपना विजिटिंग कार्ड थमाया था तब उस पर लिखे ‘मोडी स्क्रिप्ट एक्सपर्ट’ को देखकर वह चैंक गए।
यादव साम्राज्य के प्रधानमंत्री ने ईजाद की थी मोडी लिपि
अधिकारी ने मोडी को मोदी पढ़ा और कहा कि उन्हें नहीं पता था कि डेढ़ साल पहले प्रधानमंत्री बने इस शख्स (नरेंद्र मोदी) ने ऐसी कोई लिपि भी ईजाद की है। सोली ने बताया कि इससे उन्हें इस प्राचीन लिपि के प्रति लोगों की उपेक्षा का अंदाजा हुआ। उन्होंने बताया कि मोडी स्क्रिप्ट को 12वीं सदी के किसी प्रधानमंत्री ने ही ईजाद किया था। 1260 AD में यादव साम्राज्य के प्रधानमंत्री हेमाद्रि पंडित ने यह स्क्रिप्ट रिलीज की थी।
साली ने बताया कि आज भी इस लिपि में लिखे अनेक ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद हैं। साली ने कहा कि मोडी स्क्रिप्ट के लिए सोशल मीडिया या ऐप जैसे डिजिटल माध्यम उम्मीद की किरण हैं। इसके बावजूद मोडी लिपि को पुनर्जीवित करने के लिए विशेषज्ञ राज्य सरकार के हस्तक्षेप को भी महत्वपूर्ण मान रहे हैं।