जम्मू-कश्मीरः परिसीमन के बाद होंगे चुनाव, एससी-एसटी को कोटा, बढ़ेंगी जम्मू की सीटें

  • अब सीटों का आंकड़ा 111 की बजाय 107 करने की योजना है,
  • 24 सीटें पाक अधिकृत कश्मीर के लिए अब भी खाली छोड़ी जाएंगी
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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों में अभी कुछ और महीनों का वक्त लग सकता है। इसकी वजह यह है कि चुनाव आयोग पहले विधानसभा सीटों का परिसीमन करेगा और उसके बाद ही चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। इसमें कम से कम 4 महीने का वक्त लग सकता है। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन ऐक्ट, 2019 के मुताबिक सूबे में विधानसभा सीटों का परिसीमन जरूरी है।
नए परिसीमन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बनने वाले जम्मू-कश्मीर में अब विधानसभा की सीटों में एससी और एसटी को आरक्षण भी मिल सकेगा। हालांकि अब सीटों का आंकड़ा 111 की बजाय 107 करने की योजना है। अब तक इनमें से 24 सीटें पाक अधिकृत कश्मीर के लिए रिक्त रखी जाती थीं और अब भी यह सीटें खाली छोड़ी जाएंगी। इसका अर्थ यह है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के लिए 83 विधानसभा सीटों पर चुनाव होगा।
चुनाव आयोग ने अभी औपचारिक तौर पर सीटों के परिसीमन को लेकर सरकार से कोई बातचीत नहीं की है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि राज्य के मुख्य निर्वाचन आयुक्त जल्दी ही चुनाव आयोग से राज्य को लेकर पारित विधेयकों और परिसीमन के प्रस्ताव की जानकारी साझा करेंगे। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार अक्टूबर-नवंबर में चुनाव कराने के पक्ष में नहीं है। जम्मू-कश्मीर की सुरक्ष व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कुछ देरी हो सकती है।
31 अक्टूबर को होगा लद्दाख और जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन
बता दें कि चुनाव आयोग ने जून में ऐलान किया था कि जम्मू-कश्मीर में 15 अगस्त और अमरनाथ यात्रा के बाद ही चुनाव के बारे में बात की जा सकती है। हालांकि अब केंद्र सरकार ने जब 370 हटा दिया है और सूबे के पुनर्गठन का प्रस्ताव मंजूर हो गया तो फिर नए सिरे से ही पूरी प्रक्रिया शुरू की जानी है। गौरतलब है कि शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन की अधिसूचना जारी की गई थी। इसके अलावा लद्दाख और जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तारीख 31 अक्टूबर, 2019 तय की गई है। इसी दिन देश के पहले होम मिनिस्टर सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती भी है।
जम्मू की आबादी 53 लाख और कश्मीर की 68.9 लाख
जम्मू-कश्मीर में परिसीमन से बीजेपी की दशकों पुरानी मांग भी पूरी हो सकती है। बीजेपी जम्मू में कुछ और सीटों की मांग करती रही है। शेख अब्दुल्ला के दौर में कश्मीर के लिए 43, जम्मू के लिए 30 और लद्दाख के लिए 2 सीटें तय की गई थी। 2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक जम्मू की आबादी 53.78 लाख है, जबकि कश्मीर की जनसंख्या 68.9 लाख है।