17 साल में वकालत की डिग्री से भारत के सबसे महंगे वकील तक

पिछले दो हफ्ते से बीमार चल रहे देश के जाने-माने वकील राम जेठमलानी का 95 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह देश के सबसे बेहतरीन वकीलों में से एक माने जाते थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई बड़े और हाई प्रोफाइल केस लड़े और उन्‍हें जीता भी। जेठमलानी दिग्गज वकील होने के साथ-साथ केंद्रीय कानून मंत्री भी रहे थे।
राम जेठमलानी का जन्म पाकिस्तान के शिकारपुर (तब भारत का हिस्सा) में 14 सितंबर 1923 को हुआ था। वह पढ़ने में बेहद मेधावी रहे थे और उन्‍होंने दूसरी, तीसरी और चैथी क्‍लास की पढ़ाई एक साल में ही पूरी कर ली थी। दिलचस्‍प यह है कि उन्‍होंने सिर्फ 13 साल की उम्र में मैट्रिक पास कर लिया था।
जेठमलानी के पिता बोलचंद गुरमुख दास जेठमलानी और दादा भी वकील थे। शायद यही वजह थी कि उनका झुकाव भी वकालत के पेशे की ओर हुआ। पाकिस्तान बनने के बाद वहां हालात खराब हो रहे थे और राम जेठमलानी अपने एक दोस्त की सलाह पर मुंबई आ गए।

नियमों में किया गया था संशोधन
17 साल की उम्र में जेठमलानी ने वकालत की डिग्री प्राप्त कर ली थी। उस समय नियमों में संशोधन करके उन्हें 18 साल की उम्र में प्रैक्टिस करने की इजाजत दी गई। जबकि नियमानुसार प्रैक्टिस करने की उम्र 21 वर्ष तय थी। उन्हें यह छूट इसलिए दी गई थी क्योंकि उन्होंने अदालत से अनुरोध करते हुए एक आवेदन दिया था। जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था।
प्रमुख केस
राम जेठमलानी ने कई बड़े केस लड़े हैं। जिनमें नानावटी बनाम महाराष्ट्र सरकार, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारों सतवंत सिंह और बेअंत सिंह, हर्षद मेहता स्टॉक मार्केट स्कैम, हाजी मस्तान केस, हवाला स्कैम, मद्रास हाईकोर्ट, आतंकी अफजल गुरु, जेसिका लाल मर्डर केस, 2जी स्कैम केस और आसाराम का मामला शामिल है। जेठमलानी ने मुंबई और दिल्ली के कोर्ट में कई स्मगलर्स के केस की भी पैरवी की। 70 और 80 के दशक में वह काफी मशहूर हुए। वह आजाद भारत के सबसे महंगे वकीलों में से एक थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी फीस एक करोड़ रुपए तक हो गई थी।

इंदिरा-राजीव गांधी के हत्यारों की पैरवी की
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद पूरे देश में कोई भी वकील आरोपियों सतवंत सिंह और केहर सिंह के लिए पैरवी करने को तैयार नहीं था। उस वक्‍त राम जेठमलानी ने ही इस केस को अपने हाथ में लिया था।
मुंबई के डॉन हाजी मस्तान के कई मुकदमों की राम जेठमलानी ने पैरवी की थी। इसके अलावा वह उपहार सिनेमा अग्निकांड में आरोपी मालिकों अंसल बंधुओं की तरफ से और 2जी घोटाले में डीएमके नेता कनिमोझी की तरफ से पेश हुए थे। यही नहीं, चर्चित सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में अमित शाह की तरफ से अदालत में हाजिर होने वाले जेठमलानी ही थे। चारा घोटाले से जुड़े मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का केस भी उन्‍होंने ही लड़ा। सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय के लिए जेठमलानी ने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की तो संसद पर हमले में फांसी की सजा पा चुके अफजल गुरु का केस भी जेठमलानी ने ही लड़ा जिस पर उनकी काफी आलोचना भी हुई थी। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया था कि सरकार अफजल गुरु को वकील नहीं मुहैया करा रही है।

मुफ्त लड़े कई केस
जेठमलानी एक समय पर भारत में सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले लोगों की सूची में शामिल थे। उन्होंने कई केस मुफ्ट में भी लड़े हैं। अपने बेबाक अंदाज और तेवर के कारण कभी वाजपेयी सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभालने वाले जेठमलानी को भाजपा ने छह साल के लिए प्रतिबंधित किया था। जिसके कारण उन्होंने वाजपेयी के खिलाफ चुनाव लड़ा था।
राजनीतिक अनुभव
जेठमलानी 1971 और 1977 में भाजपा-शिवसेना के समर्थन से मुंबई से लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद चुने गए। बाद में 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंदीय कानून मंत्री और 1998 में शहरी विकास मंत्री रहे। एक विवादित बयान के चलते उन्हें भाजपा से बाहर कर दिया गया। इसके बाद जेठमलानी ने वाजपेयी के खिलाफ लखनऊ सीट से 2004 में निर्दलीय कैंडिडेट के तौर पर चुनाव लड़ा। हालांकि वे चुनाव हार गए।
जेठमलानी फिर भाजपा में शामिल हुए और पार्टी ने उन्हें 2010 में राजस्थान से राज्यसभा भेजा। लेकिन पार्टी के खिलाफ लगातार बयान देने पर उन्हें नवंबर 2012 में 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया गया। 2016 में लालू यादव की पार्टी ने उन्हें फिर से राज्यसभा का मेंबर बनाया।
कई पुरस्कार
जेठमलानी इंटरनेशनल ज्यूरिस्ट अवॉर्ड, वर्ल्ड पीस थ्रू लॉ अवॉर्ड, फिलीपींस में 1977 में ह्यूमन राइट अवॉर्ड से नवाजे गए।