चार साल में भारतीय सेना की तीसरी स्ट्राइक

नई दिल्ली। पाकिस्तानी सेना ने शनिवार को आतंकियों की घुसपैठ के इरादे से जब फायरिंग शुरू की तो उसे शायद ही इस बात का अंदाजा था कि भारत की ओर से उसे ऐसा मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। पाक की एक हिमाकत पर भारतीय सेना ने तोपों का मुंह एलओसी के उस पार मोड़ दिया और करीब दो दर्जन आतंकियों समेत 5 पाक सैनिकों को ढेर कर दिया। 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक, फरवरी 2019 में पुलवामा अटैक के बाद एयर स्ट्राइक और अब तोपों से हमला बोल भारत ने तीसरी स्ट्राइक को अंजाम दिया है।

बीते 4 सालों में पाकिस्तान की तीन बड़ी हरकतों पर भारत ने उसे सबक सिखाने वाली कार्रवाई की है। यह सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत के बदले हुए रवैये को बताता है। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान के प्रॉपेगैंडे को दुनिया भर में भाव न मिलने के बाद भारतीय विदेश नीति का कूटनीति और रणनीति के स्तर पर और आक्रामक होना स्वाभाविक ही है।

पाकिस्तान पर भारतीय सेना की तीसरी स्ट्राइक कितनी मारक थी, इसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि पहली बार पाक ने अपने नुकसान की बात स्वीकार की है। इससे पहले पाकिस्तान ने सर्जिकल स्ट्राइक और फिर एयर स्ट्राइक में आतंकी कैंपों या अपनी सेना को नुकसान की बात खारिज की थी। पाक सेना ने खुद स्वीकार किया है कि भारतीय कार्रवाई में उसके 1 सैनिक की मौत हुई है। हालांकि भारतीय सेना ने 5 पाक सैनिकों के ढेर होने की बात कही है।

परंपरागत युद्ध से इतर पहला मौका था, जब भारतीय सेना ने सीमा पार कर उरी आतंकी हमले के जवाब में 29 सितंबर की रात को सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकी ठिकानों को तबाह किया था। पाकिस्तान के लिए यह भारत के बदले हुए रवैये का संकेत था, लेकिन आतंकवाद को उसका समर्थन जारी रहा और उसके चलते जम्मू-कश्मीर में पुलवामा आतंकी हमला हुआ।

इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों की मौत के चलते भारत में गम और गुस्से का माहौल था। ऐसे में एक बार फिर भारतीय सेना ने ईंट का जवाब पत्थर से देते हुए इस बार पीओके बालाकोट में एयर स्ट्राइक कर जैश-ए-मोहम्मद का ठिकाने को तबाह कर दिया था। अब यह तीसरा मौका है, जब भारत ने पाकिस्तान की हिमाकत पर करारा जवाब दिया है।