फडणवीस अकेले ले सकते हैं शपथ, लेकिन सरकार कैसे बनेगी

मुंबई। महाराष्ट्र में सत्ता साझा करने को लेकर भले ही शिवसेना के तेवर तल्ख हैं पर बीजेपी को उम्मीद है कि वह सरकार में शामिल होने के लिए राजी हो जाएगी। इसी उम्मीद के साथ देवेंद्र फडणवीस गुरुवार या शुक्रवार को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। हालांकि अगर बीजेपी की सहयोगी शिवसेना महत्वपूर्ण मंत्रालयों और सीएम पोस्ट को लेकर अपने रुख नरम नहीं करती तो बीजेपी या किसी अन्य दल के पास सरकार बनाने के लिए क्या विकल्प बचेंगे, आइए समझते हैं।

पहली स्थितिः बीजेपी-शिवसेना
सबसे ज्यादा संभावनाएं इसी विकल्प की बन रही हैं। माना जा रहा है कि सरकार बनाने को लेकर बीजेपी और शिवसेना में खींचतान दरअसल दबाव बनाकर अपनी भूमिका को मजबूत करने की है। पहली बार शिवसेना ने कम सीटों पर चुनाव लड़ा है और बीजेपी को 2014 की तुलना में कम सीटें मिलीं, इस पर शिवसेना को एक मौका दिख रहा है। मंगलवार को बीजेपी और शिवसेना के नेताओं के बीच सरकार बनाने की रूपरेखा तय करने के लिए मीटिंग होने वाली थी लेकिन शिवसेना ने इसे रद्द कर दिया। हालांकि पहले भी देखा गया है कि शिवसेना के मुखपत्र सामना में पीएम मोदी पर निशाना साधा जाता है फिर भी गठबंधन चल रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले हुई डील को देखते हुए कहा जा सकता है कि मतभेद कुछ समय की बात है, आगे सरकार मिलकर ही बनेगी।

दूसरा विकल्पः बीजेपी-निर्दलीय-छोटी पार्टियां
बीजेपी को 288 सदस्यीय विधानसभा में 105 सीटें मिली हैं। शिवसेना अगर समर्थन नहीं देती है तो उसे सरकार बनाने के लिए 40 और सदस्यों के समर्थन की जरूरत होगी। बीजेपी सभी 13 निर्दलीयों का समर्थन हासिल कर लेती है, जो काफी मुश्किल काम है तो उसका आंकड़ा 118 तक पहुंच जाएगा। भगवा पार्टी को इसके बाद भी 27 सदस्यों की जरूरत होगी। छोटी पार्टियों के खाते में 16 सीटें हैं जिनमें बीजेपी की विचारधारा के विपरीत ।प्डप्ड और सीपीआई (ड) पार्टियां हैं। ऐसे में इस बात की संभावना कम ही है कि ओवैसी और येचुरी बीजेपी को समर्थन देना चाहेंगे।

स्थिति 3ः शिवसेना़ छब्च् और कांग्रेस का बाहर से समर्थन
सुनने में यह थोड़ा लीक से हटकर लगता है। हालांकि महाराष्ट्र में सरकार बनाने का एक विकल्प यह भी है। शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (छब्च्) के पास 54 सीटें और कांग्रेस पार्टी के पास 44 सीटें हैं। अगर दोनों पार्टियां शिवसेना को बाहर से समर्थन देने का फैसला करती हैं तो पहली बार ठाकरे परिवार का सदस्य महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बन सकता है। पहली बार चुनाव जीते युवा नेता आदित्य ठाकरे के दादा को किंगमेकर कहा जाता था।

बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए शिवसेना को समर्थन देने के लिए कांग्रेस भी तैयार हो सकती है। कांग्रेस के सांसद हुसैन दलवई ने भी कहा है कि हम शिवसेना को समर्थन के बारे में सोच सकते हैं लेकिन उन्हें पहल करनी होगी। चुनाव से ठीक पहले बैंक घोटाले में पवार का नाम उछाले जाने पर 79 वर्षीय नेता बीजेपी से नाराज जरूर होंगे। ऐसे में वह आदित्य ठाकरे की अगुआई वाली सरकार को बाहर से समर्थन के बारे में सोच सकते हैं और फिर बीजेपी को विपक्ष में बैठना होगा।

स्थिति 4ः अल्पमत सरकार चलाए बीजेपी
2014 में बीजेपी ने अल्पमत की सरकार चलाई थी। तब कुछ दिनों तक शिवसेना विपक्ष में रही थी और पवार की छब्च् ने फडणवीस सरकार को ऑक्सिजन दे दिया था। शरद पवार और अजीत पवार के खिलाफ म्क् के आरोपों के बीच बीजेपी की अल्पमत सरकार को बाहर से समर्थन देने के फैसले से पवार परिवार की मुश्किलें कुछ आसान हो सकती हैं।

इनमें से कौन सा विकल्प अंतिम होगा, यह फिलहाल कहा नहीं जा सकता है। हालांकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ कर दिया है कि अगले 5 साल वही सीएम रहेंगे और बीजेपी की अगुआई में सरकार बनेगी।