दिल्ली दिल वालों की

-चंद्रकान्त त्रिपाठी

24 दिसंबर 2019 को झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद मैंने अपने नियमित सम्पादकीय स्तंभ यथार्थतः को अब दिल्ली दूर नहीं…! शीर्षक से लिखा था। इसमें स्पष्ट किया था कि जनता की मूलभूत आवश्यकताओं से जुड़े मुद्दों की अनदेखी किसी भी पार्टी को चुनाव में आईना दिखा देती है। आप बेशक कुछ भी कहते रहें लेकिन धरातल पर काम का आईना कभी झूठ नहीं बोलता।
मंगलवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे बहुत कुछ कहते हैं। भाजपा ने आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल से मुख्यमंत्री की कुर्सी छीनने के लिए इस चुनाव में और पिछले पांच वर्षों में जरा भी कोर-कसर बाकी नहीं रखी। एनआरसी-सीएए पर हो-हल्ला के बीच जामिया और शाहीन बाग की गूंज चुनाव भर होती रही। राजनीति के मूल सिद्धांत के इतर किसी भी दल ने कोर-कसर नहीं छोड़ी लेकिन… जनता के असल मुद्दे हवा में ही रहे, पर जनता सब जानती है- केजरीवाल ने भी भले ही चुनावी आरोपों-प्रत्यारोपों के वाण खूब चलाए लेकिन उनके काम जरूर धरातल पर नजर आए। मोहल्ला क्लीनिक, महिलाओं को बसों में निःशुल्क यात्रा, सरकारी स्कूलों का सुदृढ़ीकरण, गरीब और मध्य वर्ग को 200 यूनिट तक निःशुल्क बिजली व निःशुल्क पानी जैसी जनहितकारी योजनाएं केजरीवाल के पास अपने पक्ष में गिनाने के लिए थीं। जनता ने भी इनके काम देखे- नतीजा सामने है- केजरीवाल फिर मुख्यमंत्री बने, तीसरी बार।
दरअसल, जनता सिर्फ योजनाओं का मकड़जाल और हवा-हवाई घोषणाओं को पसंद नहीं करती। वह तो धरातल पर काम देखना चाहती है। दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने यह कर दिखाया। नतीजतन, दिल्ली की जनता ने उन्हें फिर से सिर-आंखों पर बैठाया है।

मैं तो कहूंगा सही मायनों में केजरीवाल आज विकासपरक राजनीति की मिसाल प्रस्तुत करने वाले राजनेता बनकर उभरे हैं और उनसे आज राजनेताओं को सबक लेने की जरूरत है, जिनकी योजनाओं को उनकी सरकार के अधिकारी कागजी आंकड़ेबाजी तक सीमित रखते हैं- धरातल पर काम नहीं होता तो भला नजर कैसे आएगा?
मैं फिर कहूंगा कि पहले मध्यप्रदेश, राजस्थान फिर महाराष्ट्र और झारखंड, आप मान क्यों नहीं लेते कि जनता ने आपको अपने हितों के लिए धरातल पर काम करने को सत्ता की चाबी दी है, यदि आप विकास और जनहित के मुद्दों को नजरंदाज करने के बजाय सिर्फ खालिस सियासत ही करते रहेंगे तो फिर आगे भी आपको दिल्ली वाले ही नतीजों के लिए तैयार रहना चाहिए।