बोलती तस्वीर

चतुर्थ मां कूष्मांडा

वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्। सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्विनीम्॥

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तृतीय मां चन्द्रघंटा

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥

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प्रथमः मां शैलपुत्री

वन्दे वांछितलाभाय चन्द्रर्धकृत शेखराम्। वृशारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्री यशस्वनीम्।। पूणेन्दु निभां गौरी मूलाधार स्थितां प्रथम दुर्गा त्रिनेत्राम्।। पटाम्बर परिधानां रत्नाकिरीटा नामालंकार भूषिता।। प्रफुल्ल वंदना पल्लवाधरां कातंकपोलां तुग कुचाम्।। कमनीयां लावण्यां स्नेमुखी क्षीणमध्यां निमत्बनीम्।।

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वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।